OUR MISSION

गौ माता को मृत्यु के बाद सम्मानजनक भू-समाधि देना न केवल हमारी धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत आवश्यक है।1. धार्मिक और आध्यात्मिक कारणमातृ ऋण से मुक्ति: हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है। जिस तरह हम अपने परिजनों का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ करते हैं, उसी प्रकार गौ माता को लावारिस छोड़ने के बजाय समाधि देना हमारे सनातन संस्कारों का हिस्सा है।देवताओं का वास: मान्यताओं के अनुसार, गौ माता के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। उन्हें विधि-विधान से समाधि देने से उन सभी शक्तियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट होती है।मोक्ष और पुण्य: गरुड़ पुराण के अनुसार, गौ माता की सेवा और मृत्यु के बाद उनकी गरिमा बनाए रखने से आत्मा को वैतरणी नदी पार करने में सुगमता होती है और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।  मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से गौ माता को समाधि देने वाले भक्त को गोलोक धाम की प्राप्ति होती हसनातन कर्तव्य: गौ माता हमारे धर्म की आधारशिला हैं। उनकी मृत्यु पर उन्हें लावारिस छोड़ना हमारी संस्कृति के विरुद्ध हैसच्ची श्रद्धांजलि: "जिस गौ माता का दूध पीकर हम बड़े हुए, क्या मृत्यु के बाद उन्हें लावारिस छोड़ना उचित है? आइए, उन्हें सम्मानजनक भू-समाधि देकर अपना धर्म निभाएं".2. सामाजिक गरिमा और मर्यादा दुर्दशा से बचाव: खुले में छोड़े गए मृत गौवंश के शरीर को अक्सर जंगली जानवर या कुत्ते क्षत-विक्षत कर देते हैं, जो एक भक्त के लिए अत्यंत पीड़ादायक दृश्य होता है। समाधि देने से गौ माता के पार्थिव शरीर की पवित्रता और मर्यादा बनी रहती है।संस्कारों का बीजारोपण: नई पीढ़ी जब बुजुर्गों को गौ माता के प्रति इतना सम्मान दिखाते देखती है, तो उनमें भी जीव-दया और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का भाव जाग्रत होता है।3. वैज्ञानिक और पर्यावरणीय लाभ संक्रमण और बीमारियों से बचाव: मृत शरीर को खुले में छोड़ने से दुर्गंध फैलती है और कई तरह के संक्रामक रोगों (जैसे हैजा, प्लेग या अन्य पशु रोग) के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। समाधि देना इसे रोकने का सबसे सुरक्षित तरीका है।प्राकृतिक खाद: वैज्ञानिक विधि से दी गई समाधि समय के साथ मिट्टी में मिलकर जैविक खाद का काम करती है, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है।प्रदूषण नियंत्रण: यह जल और वायु प्रदूषण को कम करने में मदद करता है। शव को फेंकने के बजाय उसे मिट्टी में समाहित करना पर्यावरण के अनुकूल है।"दूध पिया जिसका जीवन भर, उसे लावारिस छोड़ना कैसा? आओ मिलकर धर्म निभाएं, गौ माता को समाधि दिलाएं।""सम्मानित विदाई, सच्ची सेवा।""गौ माता राष्ट्र की शान है, उनका अंतिम संस्कार हमारा मान है।"